Saturday, November 26, 2011

ओ मां तेरी आंसुओ को देख मेरा कलेजा दहल उटता है,

जो बेटा कल तक तेरी आंचल मे खेलता था,
उसकि लाश तेरे आंचल मे देख ये दिल हर वक़्त खुद को कोसता है,

जो हंसाती थी हमको हर रोते पल मे,
आज उसे रोता देख मेरा दिल रो देता है,

जिसके पलको मे रह्ता था इंतेजार हमारा,
आज उसकि पलको पे खून से सजा एक संसार रह्ता है,

जिसने सिखाया था एक नयी जिंदगी को देना,
आज उसि का लाडला सबकि जिंदगी छीन लेता है,

जो करता था अपने दोस्त को खून के रिस्ते से भी ज्यादा,
आज वहि दोस्त अपने दोस्त का खून कर देता है,

ओ मां तुझे रोता देख मेरा दिल भी रो देता है,

जो मां देती थी हर वक़्त सबको खुशियां,
आज उसि का बेटा सबसे खुशियां छीन लेता है,

कौन सहि है और कौन गलत है आज ये तु हि फैसला कर मां,

एक वो तेरा खून था जो अपनी खुशियो के लिये सबका खून कर देता था,
एक वो तेरी आंचल मे खेला वो बेटा है जो सबके लिये तेरे बेटे का खून कर देता है,

ऐसा क्युं होता है एक जिता है तो एक मरता है ?
ओ मां तुझे रोता देख मेरा दिल खून के आंसु रोता है,

लेखक:रोशन दूबे
लेखन दिनाँक: 26 नवम्बर २०११

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